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IGNOU BSKC-104 Geeta me Aatmprabandhan - IGNOU Solved Assignment (Latest)

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IGNOU BSKC-104 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions

खण्ड 1

1. गीता का परिचय देते हुए गीता का अभिप्राय स्पष्ट करें और गीता के प्रयोजन एवं उसके प्रतिपाद्य विषय का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
अथवा
गीता की सामाजिक और सांस्कृतिक महत्य का विस्तारपूर्वक उलेखकानें।
2. गीता की मुख्य शिक्षाओं का विस्तृत रूप से उल्लेख करें।
अथवा
गीता के अनुसार पुरुषार्थ चतुष्टय की अवधारणा पर प्रकाश डालें।
3. गीता को निष्काम कर्म योग के अभिप्राय और उसके बल पर विस्तारपूर्वक लियाँ।
अथवा
गीता में वर्णित आत्म ताथ का विस्तृत रूप से उज्लेया करें।
खण्ड 2
4. निम्नलिखित में से किन्हीं दी शतीकों की सप्रसंग व्याख्या करे।
क) न बुद्धिमेंद्र जनयेदज्ञानां कर्म सदि.गनाम्।
व्यषियेत्तार्यक्रमांगि विद्वान्युक्तः समाचरन।।
ख) न हि कश्विक्षणमपि जातु विष्ठत्यकर्मकृत।
कार्यते हायशाः कर्म सके प्रकृतिणैर्गुगे ।।
ग) नष्टी मोहः स्मृतिर्लब्या व्यत्प्रसादान्सवाच्युत।
स्थितोऽस्मि मतसन्देह करिष्ये वचनं तय।।
घ) विहाय कामान व सर्वान्पुमांश्चरति निस्पूह ।
निर्ममी निरहंकार स शान्तिमधिगच्छति ।।
5• निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी करें।
क) गीता में वकर्मयोग की प्रशंसा
ख) शारीरिक और मानसिक अनुशासन
ग) काम पर नियंत्रण
घ) गीता में स्थिानी की प्रशंसा

 

IGNOU BSKC-104 (July 2023 – January 2024) Assignment Questions

खण्ड 1

1. गीता का सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
अथवा
गीता के अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए गीता का परीचय और उसके प्रयोजन पर प्रकाश डालें

2. गीता में वर्णित स्थितधी की प्रशंसा का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
अथवा
भारतीय संस्कृति के निश्काम कर्मयोग की प्रशंसा को उद्धरण सहित स्पष्ट कीजिए ।

3. इंद्रियों के अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए उसकी संख्या तथा स्वभाव पर प्रकाश डालें ।
अथवा
पुरुषार्थ चतुष्ट की अवधारणा को स्पष्ट करें।

खण्ड 2

4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो श्लोकों की सप्रसंग व्याख्या करें।

क) काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुदभ्वः ।
महाशनो महापाप्मा विद्धयेनमिह वैरिणम् ।।

ख) अथैतदप्यशत्तोडऽसि कतुं मद्योगमाश्रितः ।
सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ।।

ग) अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् ।
परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् ।।

घ) असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति में मतिः ।
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः । ।

5. निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी करें।

(क) गीता की मुख्य शिक्षाएं
ख) गीता में कर्मयोग की प्रशंसा
ग) इंद्रीय निग्रह व इंद्रीयनिग्रह फल
घ) निश्काम कर्म योग

BSKC-104 Assignments Details

University : IGNOU (Indira Gandhi National Open University)
Title :Geeta me Aatmprabandhan
Language(s) : Sanskrit
Code : BSKC-104
Degree :
Subject : Sanskrit
Course : Core Courses (CC)
Author : Gullybaba.com Panel
Publisher : Gullybaba Publishing House Pvt. Ltd.
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