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IGNOU BHDE-143 Premchand - IGNOU Solved Assignment (Latest)

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BHDE-143
Language : 
Hindi
Semester : 
5th
Year : 
3rd
541.00
1,150.00
Save 609.00
BAPI-03
BHDE-143
BHDG-173
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BHDG-173
Language : 
Hindi
Semester : 
5th
Year : 
3rd
381.00
810.00
Save 429.00
BAPI-03
BHDE-143
BHDG-175
BAPI-03
BHDE-143
BHDG-175
Language : 
Hindi
Semester : 
5th
Year : 
3rd
428.00
910.00
Save 482.00
BAPI-03
BHDE-143
ONR-03
BAPI-03
BHDE-143
ONR-03
Language : 
Hindi
Semester : 
5th
Year : 
3rd
301.00
640.00
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IGNOU BHDE-143 (January 2025 – July 2025) Assignment Questions

भाग-क 
1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए। 
(क) निस्सन्देह, काव्य और साहित्य का उद्देश्य हमारी अनुभूतियों की तीव्रता को बढ़ाना है, पर मनुष्य का जीवन केवल स्त्री-पुरुष प्रेम का जीवन नहीं है। क्या वह साहित्य, जिसका विषय श्रृंगारिक मनोभावों और उनसे उत्पन्न होने वाली विरह व्यथा, निराशा आदि तक ही सीमित हो-जिसमें दुनिया और दुनिया की कठिनाइयों से दूर भागना ही जीवन की सार्थकता समझी गयी हो, हमारी विचार और भाव संबंची आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। श्रृंगारिक मनोभाव मानव जीवन का एक अंग मात्र है और जिस साहित्य का अधिकांश इसी से संबंध रखता हो, वह उस जाति और उस युग के लिए गर्व करने की वस्तु नहीं हो सकता और न उसकी सुरुचि का ही प्रमाण हो सकता है।
(ख) बिरला ही कोई भला आदमी होगा, जिसके सामने बुडिया ने दुःख के आँसू न बहाये हों। किसी ने तो यों ही ऊपरी मन से हूँ-हीं करके टाल दिया, और किसी ने इस अन्याय पर जमाने को गालियों दी। कहा-कब्र में पाँच लटके हुए हैं. आज मरे कल दूसरा दिन, पर हवस नहीं मानती। अब तुम्हें क्या चाहिए ? रोटी खाओ और अल्लाह का नाम लो। तुम्हें अब खेती-बारी से क्या काम है? कुछ ऐसे सज्जन भी थे, जिन्हें हास्य रस के रसास्वादन का अच्छा अवसर मिला। झुकी हुई कमर, पोपला मुँह, सन के से बाल-इतनी सामग्री एकत्र हों, तब हँसी क्यों न आवे ? ऐसे न्यायप्रिय, दयालु, दीन-वत्सल पुरुष बहुत कम थे, जिन्होंने उस अबला के दुखड़े को गौर से सुना हो और उसको सांत्वना दी हो।
(ग) खिलौने से क्या फायदा? व्यर्थ में पैसे खराब होते हैं। जरा देर ही तो खुशी होती है। फिर तो खिलौने को कोई आँख उठाकर नहीं देखता। या तो घर पहुँचते-पहुँचते टूट-फूट बराबर हो जायेंगे या छोटे बच्चे जो मेले में नहीं आये हैं जिद कर के ले लेंगे और तोड़ डालेंगे। चिमटा कितने काम की चीज है। रोटियों तवे से उतार लो. चूल्हें में सेंक लो। कोई आग माँगने आये तो चटपट चूल्हे से आग निकालकर उसे दे दो। अम्मों बेचारी को कहाँ फुरसत है कि बाजार आयें और इतने पैसे ही कहाँ मिलते हैं? रोज हाथ जला लेती हैं।
(घ) दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी। यह मारते-मारते यक गया, पर दोनों ने पाँव न उठाया। एक बार जब उस निर्दयी ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाये तो मोती का गुस्सा काबू से बाहर हो गया। हल लेकर भागा। हल, रस्सी, जुआ, जोत, सब टूट-टाटकर बराबर हो गया। गले में बड़ी-बड़ी रस्सियों न होती तो दोनों पकड़ाई में न आते।
भाग-ख 
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 760-800 शब्दों में दीजिए। 
(1) प्रेमचंद के कहानियों का परिचय देते हुए उनकी विशेषताएँ बताइए।
(2) पंच परमेश्वर कहानी की शिल्पगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
(3) ईदगाह कहानी की भाषा और शैली की विशेषताएँ उदाहरण सहित बताइए।
भाग-ग 
3. निम्नलिखित विषयों पर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए : 
(1) प्रेमचंद के नाटक
(2) शतरंज के खिलाड़ी कहानी का सार
(3) सेवासदन की नापा

IGNOU BHDE-143 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions

भाग-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए ।

(क) संध्या समय सदन की नाव गंगा की लहरों पर इस भाँति चल रही थी, जैसे आकाश में मेघ चलते है। लेकिन उसके चेहरे पर आनन्द – विलास की जगह भविष्य की शंका झलक रही थी, जैसे कोई विद्यार्थी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद चिंता में ग्रस्त हो जाता है। उसे अनुभव होता है कि वह बाँध, जो संसार रूपी नदी की बाए से मुझे बचाए हुए था, टूट गया है और मैं अथाह सागर में खड़ा हूँ। सदन सोच रहा था कि मैंने नाव तो नदी में डाल दी, लेकिन यह पार भी लगेगी? उसे अब मालूम हो रहा था कि वह पानी गहरा है, हवा तेज है और जीवन-यात्रा इतनी सरल नहीं है, जितनी मैं समझता था । लहर यदि मीठे स्वरों में गाती है, तो भयंकर ध्वनि से गरजती है। हवा अगर लहरों को थपकियाँ देती हैं, तो कभी-कभी उन्हें उछाल भी देती है।

(ख) हमने जिस युग को अभी पार किया है, उसे जीवन से कोई मतलब न था । हमारे साहित्यकार कल्पना की एक सृष्टि खड़ी करके उसमें मनमाने तिलस्म बाँधा करते थे। कहीं फिसानये अजायब की दास्तान थी, कहीं दास्ताने खयाल की और कहीं चन्द्रकान्ता – सन्तति की। इन आख्यानों का उद्देश्य केवल मनोरंजन था और हमारे अद्भुत रस-प्रेम की तृप्ति, साहित्य का जीवन से कोई लगाव है, यह कल्पनातीत था। कहानी कहानी है, जीवन जीवन |

( ग ) जबरा शायद समझ रहा था कि स्वर्ग यहीं है और हल्कू की पवित्र आत्मा में तो उस कुत्ते के प्रति घृणा की गंध तक न थी । अपने किसी अभिन्न मित्र या भाई को भी वह इतनी ही तत्परता से गले लगाता। वह अपनी दीनता से आहत न था, जिसने उसे आज इस दशा को पहुँचा दिया। नहीं, इस अनोखी मैत्री ने जैसे उसकी आत्मा के सब द्वार खोल दिये थे। सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। इस विशेष आत्मीयता ने उसमें एक नई स्फूर्ति पैदा कर दी थी, जो हवा के झोंकों को तुच्छ समझती थी ।

(घ) मंडल के भवन में पग धरते ही उसकी लेखनी कितनी मर्मज्ञ, कितनी विचारशील, कितनी न्यायपरायण हो जाती है। इसका कारण उत्तरदायितव का ज्ञान है। नवयुवक युवावस्था में कितना उदण्ड रहता है। माता-पिता उसकी ओर से कितने चिंतित रहते हैं! वे उसे कुल-कलंक समझते हैं, परन्तु थोड़े ही समय में परिवार का बोझ सिर पर पड़ते ही वह अव्यवस्थित-चित्त उन्मत्त युवक कितना धैर्यशील, कैसा शांतचित्त हो जाता है, यह भी उत्तरदायित्व के ज्ञान का फल है।

भाग – ख

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 750-800 शब्दों में दीजिए ।

( 1 ). प्रेमचंद की कहानियों की विशेषताएँ बताइए ।
( 2 ). ‘साहित्य का उद्देश्य के विचार पक्ष का विवेचन कीजिए।
( 3 ). ‘पंच परमेश्वर’ कहानी के संरचना – शिल्प पर प्रकाश डालिए ।

भाग-ग

3. निम्नलिखित विषयों पर (प्रत्येक ) लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए:

(1) हल्कू’ की चारित्रिक विशेषताएँ
(2) प्रेमचंद का वैचारिक गद्य
(3) ‘शतरंज के खिलाड़ी’ की कथावस्तु

BHDE-143 Assignments Details

University : IGNOU (Indira Gandhi National Open University)
Title :Premchand
Language(s) : Hindi
Code : BHDE-143
Degree :
Subject : Hindi
Course : Discipline Specific Electives (DSE)
Author : Gullybaba.com Panel
Publisher : Gullybaba Publishing House Pvt. Ltd.
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