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IGNOU BHDC-103 Aadikalin evam Madhyakalin Hindi Kavita - IGNOU Solved Assignment (Latest)

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BGDG-172
BHDAE-182
BHDC-103
BHDC-104
Language : 
Hindi
Semester : 
2nd
Year : 
1st
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IGNOU BHDC-103 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions

भाग-1

1. निम्नलिखित पद्याशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिएः

(क) गोरी सोवै सेज पर मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने रैन भई चहुँ देस ॥
[[सरो रैन सोहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पिऊ को दोऊ भए एक रंग ॥

(ख) हम न मरें मरिहै संसारा।
हमको मिला जिआबनहारा।।
साकत मरहिं संत जन जीवहिं, भरि भरि राम रसाइन पीवहिं।
हरि मरहिं तो हमहूँ मरिहैं, हरि न मरै हम काहे कौ मरिहैं।
कहै कबीर मन मनहिं मिलावा अमर भया सुखसागर पावां ।।

(ग) अंखियां हरि-दरसन की प्यासी।
देख्यौ चाहत कमलनैन कौ, निसि दिन रहति उदासी ।।
आए जूधौ फिरि गए आंगन, डारि गए फांसी।
केसरि तिलक मोतिन की माला, वृन्दावन के बासी ।।
काहू के मन को कोउ न जानत, लोगन के मन हांसी।
सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस कौ करवत लैहों कासी ।।

(घ) खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि.
बनक को बनिज, न चाकर को चाकरी।
जेविका विहीन लोग सीदमान सोच बस,
कहैं एक एकन सों, ‘कहाँ जाई, का करी?
बेदहूँ पुरान कही. लोकहूँ बिलोकिअत,
साँ सबै पै. राम ! रावर कृपा करी।
दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु !
दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी।।

भाग-2

2. तुलसीदास की भक्ति में प्रेम के महत्य की विवेचना कीजिए।

3. रहीम लोक जीवन के पारखी थे।’ इस कथन की समीक्षा कीजिए।

4. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए :

क. मीराबाई की भक्ति भावना
ख. सतसई परम्परा और बिहारी सतसई

भाग-3

5. रसखान की भक्ति भावना की विशिष्टताओं का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।

6. सूर के काव्य न ब्रज का लोकजीवन किन रुपों में आया है? सोदाहरण उल्लेख कीजिए।

7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिएः

(क) जायसी की भाषा और काव्य सौंदर्य
(ख) विद्यापति का काव्य सौंदर्य

 

IGNOU BHDC-103 (January 2025 – July 2025) Assignment Questions

भाग – 1

1. निम्नलिखित पद्याशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए:

(क) सुधामुखि के बिहि निरमलि बाला ।
अपरुब रूप मनोभवमंगल
त्रिभुवन विजयी माला ।।
सुन्दर बदन चारु अरु लोचन
काजर – रंजित भेला ।
कनक – कमल माझे काल भुजंगिनि
श्रीयुत खंजन खेला।।
नाभि बिबर सएं लोम-लतावलि
भुजगि निसास – पियासा
नासा खगपति – चंचु भरम – मय
कुच – गिरि-संधि निवासा ।।

(ख) संतो भाई आई ग्यांन की आंधी रे।
भ्रम की टाटी सभै उड़ांनी माया रहै न बांधी रे ।।
दुचिते की दोइ थूनि गिरांनीं मोह बलेंडा टूटा ।
त्रिसना छांनि परी घर ऊपरि दुरमति भांडा फूटा ।।
आंधी पाछें जो जल बरसै तिहिं तेरा जन भींना ।
कहै कबीर मनि भया प्रगासा उदै भानु जब चींना ।।

(ग) ऊधौ तुम हौ चतुर सुजान ।
हमक तुम सोई सिख दीजौ, नंद सुवन की आन ।।
आमिश है भोजन हित जाकौ सो क्यों सागहिं मान ।
ता मुख सेम पात क्यौं परसत, जा मुख खाए पान ।।
किंगरी स्वर कैसैं सचु मानत, सुनि मुरली की तान ।
सुख तौ ता दिन होइ सूर ब्रज, जा दिन आवै कान्ह ||

(घ) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय ।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय ।।
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत ।
बिपति कसौटी जे कसे, तो ही साँचे मीत । ।
छिमा बड़न को चाहिए, छोटेन को उतपात ।
का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात ।।

भाग-2

2. जायसी की भक्ति में प्रेम के महत्त्व की विवेचना कीजिए ।

3. कबीर की सामाजिक चेतना के प्रमुख पक्षों का उल्लेख कीजिए ।

4. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए:

(क) सूरदास की भक्ति भावना
(ख) तुलसी का रामराज्य

भाग-3

5. घनानंद की श्रृंगार भावना की विशिष्टताओं का सोदाहरण उल्लेख कीजिए ।

6. रहीम की रचनात्मक विशिष्टताओं का उल्लेख कीजिए ।

7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए:

(क) मीरा का काव्य सौंदर्य
(ख) विद्यापति का काव्य सौंदर्य

 

IGNOU BHDC-103 (January 2024 – July 2024) Assignment Questions

भाग-1

1. निम्नलिखित पद्याशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए:

(क) हरि जननी मैं बालक तेरा।
काहे न अवगुन बकसहु मेरा ।।
सुत अपराध करत है केते । जननी के चित रहें न तेते ।।
कर गहि केस करै जौ घाता। तऊ न हेत उतारै माता ।।
कहै कबीर इक बुद्धि बिचारी। बालक दुखी दुखी महतारी ।।

(ख) अखियाँ हरि दरसन की प्यासी ।
देख्यौ चाहति कमलनैन कौं, निसि दिन रहति उदासी।।
आए ऊधौ फिरि गए आँगन, डारि गए गर फाँसी ।
केसरि तिलक मोतिनि की माला, वृंदावन के वासी ।।
काहू के मन की कोउ जानत लोगनि के मन हाँसी ।
सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस कौं, करवत लैहौं कासी ।।

(ग) धूत कही, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहाँ कोऊ ।
काहूकी बेटीसों, बेटा न ब्याहब काहूकी जाति बिगार न सोऊ ।।
तुलसी सरनाम गुलाम है रामको, जाको, रुचै सो कहै कछु ओऊ।
माँगि के खैबो, मसीतको सोइबो, लैबोको एकु न दैबैको दोऊ ।।

(घ) मैंने नाम रतन धन पायौ ।
बसत अमोलक दी मेरे सतगुरु करि किरपा अपणायो ।।
जनम जनम की पूँजी पाई जग मैं सबै खोवायो ।
खरचै नहिं कोई चोर न ले वे दिन-दिन बढ़त सवायो।।
सत की नॉव खेवटिया सतगुरु भवसागर तरि आयो ।
मीरां के प्रभु गिरधर नागर हरखि हरखि जस गायो । ।

भाग-2

2. अमीर खुसरो की भाषागत विशिष्टताओं पर प्रकाश डालिए

3. कबीर के राम के स्वरूपों को स्पष्ट कीजिए ।

4. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए:

(क) जायसी की भक्ति
(ख) सूरदास की कविता में वात्सल्य

भाग-3

5. सतसई परंपरा और ‘बिहारी सतसई’ पर प्रकाश डालिए ।

6. मीराबाई अपने समय के पुरुष संत कवियों से किस प्रकार भिन्न हैं, स्पष्ट कीजिए ।

7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए:

(क) रहीम के काव्य में लोक जीवन
(ख) घनानंद की कविता में प्रेम और सौंदर्य

BHDC-103 Assignments Details

University : IGNOU (Indira Gandhi National Open University)
Title :Aadikalin evam Madhyakalin Hindi Kavita
Language(s) : Hindi
Code : BHDC-103
Degree :
Subject : Hindi
Course : Core Courses (CC)
Author : Gullybaba.com Panel
Publisher : Gullybaba Publishing House Pvt. Ltd.

IGNOU BHDC-103 (Jul 25 - Jan 26, Jan 25 - Jul 25, Jan 24 - Jul 24) - Solved Assignment

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Assignment Submission End Date-upto

The IGNOU open learning format requires students to submit study Assignments. Here is the final end date of the submission of this particular assignment according to the university calendar.

  • 30th April (if Enrolled in the June Exams)
  • 31st October (if Enrolled in the December Exams).

What’s Included

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