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IGNOU BHDC-104 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
खंड – क
1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए:
क) कहता है कौन कि भाग्य ठगा है मेरा?
वह सुना हुआ भय दूर भगा है मेरा।
कुछ करने में अब हाथ लगा है मेरा,
वन में ही तो गार्हस्थ्य जगा है मेरा।
यह वधु जानकी बनी आज यह जाया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
ख) जिस निर्जन में सागर लहरी
अन्धर के कानों में गहरी-
निश्छल प्रेम-कथा कहती हो,
तज कोलाहल की अपनी रे।
जहाँ साँझ-सी जीवन छाया,
कीले अपनी कोमल काया,
नील नयन से कुलकाती हो,
ताराओं की पाँति घनी रे।
ग) देखते देखा मुझे तो एक बार
उस भवन की ओर देखा, छिन्नतारः
देखकर कोई नहीं,
देखा मुझे उस दृष्टि से
जो मार खा रोयी नहीं,
सजा सहज सितार,
सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार
एक क्षण के बाद यह कॉपी सुघर,
कुलक माथे से गिरे सीकर,
लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा-
में तोडती पत्थर।
घ) अन्य होंगे चरण हारे,
और हैं जो लौटते, दे शूल को संकल्प सारे,
दुखव्रती निर्माण उन्मद,
यह अमरता नापते पद.
बाँध देंगे अंक-संसृति
से तिमिर में स्वर्ण बेला!
खंड – ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
2. भारतेन्दु के काव्य में निहित प्राचीन प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
3. द्विवेदी युगीन काव्य की साहित्यिक प्रवृत्तियों को रेखांकित कीजिए।
4. छायावाद की अन्र्त्तवस्तु पर विचार कीजिए।
5. जयशंकर प्रसाद की सौंदर्य चेतना पर प्रकाश डालिए।
खंड – ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए :
6. भारतेन्दु के छंद विधान को उदाहरण सहित समझाइए।
7. रामनरेश त्रिपाठी के काव्य में अन्तर्निहित राष्ट्रीय भावना पर प्रकाश डालिए।
8. निराला की काव्य भाषा की विशेषताएं बताइए।
9. पंत की नारी दृष्टि को रेखांकित कीजिए।
IGNOU BHDC-104 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
खंड – क
निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए :
1. जायें सिद्धि पायें वे सुख से.
दुखी न हों इस जन के दुख से
उपालम्भ दूँ मैं किस मुख से ?
आज अधिक वे भाते ।
गये, लौट भी वे आयेंगे.
कुछ अपूर्व अनुपम लायेंगे.
रोते प्राण उन्हें पायेंगे,
पर क्या गाते गाते ?
सखि, वे मुझसे कह कर जाते।
2. सिद्धि हेतु स्वामी गए. यह गौरव की बात
पर चोरी-चोरी गए यही बड़ा व्याघात
सखी, वे मुझसे कह कर जाते
कह, तो क्या मुझसे कह कर जाते
कह, तो क्या मुझसे वे अपनी पथ-बाधा ही पाते ?
3. प्रथम रश्मि का आना रंगिणि
तूने कैसे पहचाना?
कहाँ-कहाँ हे बाल विहंगिनि
पाया तूने यह गाना ?
सोयी थी तू स्वप्न नीड़ में
पंखों के सुख में छिपकर,
ऊँघ रहे थे, घूम द्वार पर
प्रहरी से जुगनू नाना.
शशि किरणों से उतर उतरकर
भू पर कामरूप नभचर
चूम नवल कलियों का मृदु मुख
सिखा रहे थे मुसकाना,
स्नेह हीन तारों के दीपक,
श्वास शून्य थे तरु के पात,
विचर रहे थे स्वप्न अवनि में,
तम ने था मण्डप ताना
कूक उठी सहसा तरुवासिनि ।
4. अंबर पनघट में डुबो रही-
तारा-घट ऊषा नागरी
खग-कुल कुल-कुल सा बोल रहा
किसलय का अंचल डोल रहा
ले यह लतिका भी भर लाई
मधु मुकुल नवल रस गागरी
खंड -ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
5. भारतेंदु के काव्य की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
6. द्विवेदीयुग के प्रमुख कवियों का परिचय दीजिए ।
7. छायावाद के रचना विधान पर विचार कीजिये ।
8. महादेवी वर्मा के काव्य की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित कीजिये ।
खंड – ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए:
9. भारतेंदु युगीन काव्य की नवीन प्रवृत्तियों की चर्चा कीजिए ।
10. प्रिय प्रवास’ का महत्व बताइए।
11. निराला काव्य की अंर्तवस्तु को रेखांकित कीजिए ।
12. मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में अंर्तनिहित मानवतावादी दृष्टिकोण का परिचय दीजिए ।




