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IGNOU BHDC-112 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
खंड-1
निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
1. ललित निबंध के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालिए।
2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो की सप्रसंग व्याख्या लिखिए :
(क)” राजा हरिश्चंद्र ने अपनी रानी शैव्या से अपने ही मृत पुत्र के कफन का टुकड़ा फड़वा नियम का अद्भुत पालन किया था। पर यह समझ रखना चाहिए कि यदि शैव्या के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री होती तो राजा हरिश्चंद्र के उस नियम पालन का उतना महत्व न दिखाई पड़ताय करुणा ही लोगों की श्रद्धा को अपनी ओर अधिक खींचती है। करुणा का विषय दूसरे का दुख हैय अपना दुख नहीं। आत्मीय जनों का दुख एक प्रकार से अपना ही दुख है। इससे राजा हरिश्चंद्र के नियम पालन का जितना स्वार्थ से विरोध था उतना करुणा से नहीं।”
(ख) “हृदय के भीतर जलनेवाली विरहाग्नि ने उसे किसी काम का नहीं छोड़ा। हे भगवान, तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकते कि सारे गाँव के समान इस बालिका को भी चंद्रमा उतना ही शीतल लगे जितना औरों को लगता है! अर्थात् विरहिणी की दारूण व्यथा अब सब के चित्त की सामान्यअनुभूति के साथ ताल मिलाकर चलने लगी। पागल का श्लगनाश एक का लगना होता है, कवि का लगना सबको लगने लगता है। बात उलट कर कही जाय तो इस प्रकार होगी जिसका लगना सबको लगे वह कवि है, जिसका लगना सिर्फ उसे ही लगे, औरों को नहीं, वह पागल। लगने लगने में भी भेद है। जो सबको लगे, वह अर्थ है, जो एक को ही लगे, वह अनर्थ है। अर्थ सामाजिक होता है। ”
(ग) “हाँ, उसके रूखे केश धीरे से कुछ कह गए। कुछ सुना है और अधिकांश अनसुना रह गया। पेट ही पहार है, इन केशों को सँवारने की किसे फुरसत है। यह जलता हुआ जमाना, यह महामारी-सी महँगाई, यह काल-सा अकाल ! जिनके लाल सूखे वक्ष की ठठरियों को चिचोर-चिचोर कर चिल्लाते हैं, जिनके लिए मनुष्य ही भगवान है, जिनके लिए मुट्ठी भर अन्न ही मोक्ष सुख है उनके लिए क्या केश और क्या श्रृंगार ! क्या अनुराग और क्या सुहाग !”
खंड-2
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 700-800 शब्दों में लिखिए।
3. निबंध की परिभाषा बताते हुए निबंधों के वर्गीकरण पर प्रकाश डालिए।
4. ‘करुणा’ निबंध का प्रतिपाद्य लिखिए।
5. ‘गिल्लू’ रेखाचित्र का सारांश लिखिए।
6. ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है निबंध के महत्व पर प्रकाश डालिए।
7. महाकवि जयशंकर प्रसाद ‘संस्मरण के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
8. ‘रजिया’ रेखाचित्र का प्रतिपाद्य बताइए।
9. ‘आम रास्ता नहीं है’ का कथासार लिखिए।
IGNOU BHDC-112 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
खंड- 1
1. ललित निबंध के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालिए ।
2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो की सप्रसंग व्याख्या लिखिए:
(क) पर इस परीक्षा में एकाएक उसका दर्द उस ढ़लती रात में उभर आया और सोचने लगा, आने वाली पीढ़ी, पिछली पीढ़ी की ममता की पीड़ा नहीं समझ पाती और पिछली पीढ़ी अपनी संतान के संभावित संट की कल्पना मात्र से उद्विग्न हो जाती है। मन में वह प्रतीति ही नहीं होती कि अब संतान समर्थ है, बड़ा से बड़ा संकट झेल लेगी।”
(ख) “ध्वनिसाम्य साधन है, तुक अर्थ का धर्म होना चाहिए। मगर कहना खतरे से खाली नहीं है। किसी आलोचक अर्थ को लय की वकालत की है। मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि सारी पंडित – मंडली उस गरीब पर बरस पड़ी है। अगर तुक अर्थ में मिल सकता है तो लय क्यों नहीं मिल सकता। मेरे अंतर्यामी कहते हैं कि तुक तो अर्थ में नहीं रहता है लय नहीं रहता। बहुत से लोग अंतर की आवाज को आँख मूँदकर मान लेते हैं। मैं नहीं मान पाता। आँखें खोलने पर भी यदि अंतर की आवाज ठीक जँचे तो मान लेना चाहिए, क्योंकि उस अवस्था में भीतर और बाहर का तुक मिल जाता है।”
(ग) “और यह मार्ग हमारी नागरिकता पर एक व्यंग्य के समान है। फाटक पर दोनों ओर स्पष्ट लिखा है- ‘आम रास्ता नहीं है। अब सोचता हूँ कि आम रास्ता किसे कहते हैं? अवश्य ही यह कोई खास रास्ता है। आम लोगों का रास्ता तो दूसरा है। यह शायद भूले हुए लोग हैं। ये मार्गच्युत लोग हैं। ये अनजान लोग हैं। हे भगवान न जाने कब इन्हें अभीष्ट पथ का ज्ञान होगा?”
खंड-2
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 700-800 शब्दों में लिखिए।
3. निबंध के उद्भव एवं विकास पर प्रकाश डालिए ।
4. ‘मजदूरी और प्रेम निबंध का प्रतिपाद्य लिखिए ।
5. ये हैं प्रोफेसर शशांक रेखाचित्र का सारांश लिखिए।
6. आम रास्ता नहीं है के महत्व पर प्रकाश डालिए ।
खंड-3
7. तुम्हारी स्मृति संस्मरण’ के माध्यम से बाल गंगाधर तिलक जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए ।
8. ‘गिल्लू’ रेखाचित्र का प्रतिपाद्य बताइए ।
9. ‘देवदार’ का कथासार लिखिए।








