IGNOU BSKC-111 Vaidik Sahitya - IGNOU Solved Assignment (Latest)
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IGNOU BSKH BSKC-111 (January 2026 – July 2026) Assignment Questions
प्रथ- 1 निम्नलिखित में से किन्हीं दो मत्रों की व्याख्या कीजिए –
a) उषो वाजेन वाजिनि प्रचेताः स्तोम जुषस्व गृणतो मघोनि । पुराणी देवी युवतिः पुरन्धिरनुव्रतं चरसि विश्ववारे ।। ॥
b) हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् । स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥
c) सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्मयज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पन्युरुं लोके पृथ्वी नः कृणोतु ॥
d) येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्व यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ।।2 ।।
प्रश्न 2 निम्नलिखित में से किसी दो पर टिप्पणी लिखिए वैदिक लेट् लकार, स्वरित, पद-पाठ
प्रथ 3 किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
a. ऋग्वैदिक परंपरा में अग्रि देवता के स्वरूप का दार्शनिक एवं प्रतीकात्मक विश्लेषण कीजिए।
b. हिरण्यगर्भ सूक्त को सृष्टि-दर्शन का आधार-ग्रंथ मानते हुए, उसमें प्रतिपादित ईश्वर-तत्त्व की अवधारणा का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए तथा उपनिषदिक ब्रह्म-चिन्तन से उसकी तुलना कीजिए।
c. शिवसंकल्प सूक्त में वर्णित ‘मन’ की अवधारणा का मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक विश्लेषण कीजिए तथा भारतीय चिंतन-परंपरा में मन-नियंत्रण की भूमिका पर समीक्षात्मक टिप्पणी कीजिए।
प्रश्न 4 निम्नलिखित में से किसी एक की व्याख्या कीजिए
a) तदेतत् सत्यं मचेषु कर्माणि कवयो यान्यपश्यंस्तानि त्रेतायां बहुधा संततानि । तान्याचरथ नियतं सत्यकामा एष वः पन्थाः सुकृतस्य लोके ॥
b) यत् तदद्देश्यमग्राह्यमगोत्रमवर्णमचक्षुः श्रोत्रं तदपाणिपादम् । नित्यं विभुं सर्वगतं सुसूक्ष्म तदव्यये यद् भूतयोनिं परिपश्यन्ति धीराः ॥ ॥
c) नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन । यमेवैष वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम् ॥
प्रश्न – 5 मुण्डक उपनिषद् में प्रतिपादित ‘परा विद्या’ और ‘अपरा विद्या’ के सिद्धान्त का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए ।
अथवा
मुण्डक उपनिषद् में वर्णित ‘द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया’ रूपक की दार्शनिक व्याख्या करते हुए जीव, आत्मा और परमात्मा के सम्बन्ध का समीक्षात्मक विश्लेषण कीजिए।
IGNOU BSKC-111 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
प्रश्न 1 निम्नलिखित में से किन्हीं दो मत्रों की व्याख्या कीजिए –
a) उषो वाजेन वाजिनि प्रचेताः स्तोमं जुषस्व गृणतो मघोनि। पुराणी देवि युवतिः पुरन्धिरनु व्रतं चरसि विश्ववारे ॥
b) येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्व यक्षमन्तः प्रजानान्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥
c) अनुव्रतः पितुः पुत्रो मात्रा भवतु संमनाः । जाया पत्ये मधुवतीं वाचं वदतु शन्तिवाम् ॥
d) प्रावेपा मा बृहतो मादयन्ति प्रवातेजा इरिणे वर्वृतानाः । सोमस्येव मौजवतस्य भक्षो विभीदको जागृविर्मह्यमच्छान् ॥
प्रश्न – 2 निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
a) स्वरित क्या होता है? वैदिक संस्कृत में इसका क्या महत्त्व है? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
b) वैदिक शब्दरूप लौकिक संस्कृत के शब्दरूपों से किस प्रकार भिन्न होते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
c) वैदिक त्तत्वार्थक एवं तुमर्थक प्रत्यय
d) वैदिक संस्कृत में स्वर एवं पदपाठ का क्या महत्त्व है? संक्षेप में समझाइए।
प्रश्न – 3 किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
a) हिरण्यगर्भ सूक्त का दार्शनिक महत्त्व लिखिए।
b) उषा सूक्त के आधार पर उषा देवी का वर्णन कीजिए।
c) सामनस्यम् सूक्त के अनुसार सामजिक सौहार्द का स्वरूप लिखिए।
d) शिव संकल्प सूक्त में मन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
प्रश्न- 4 निम्नलिखित में से किसी एक की व्याख्या कीजिए
a) सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः । येनाक्रमन्त्यूषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम् ॥
b) सर्वे वेदा यत्पदं आमनन्ति तपांसि सर्वाणि च यद्वदन्ति । यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेण ब्रवीमि ओम् इति एतत् ॥
c) यथा नद्यः स्यन्दमानाः समुद्रेऽस्तं गच्छन्ति नामरूपे विहाय । तथा विद्वान् नामरूपाद्विमुक्तः परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम् ॥
प्रश्न – 5 मुण्डकोपनिषद् के अनुसार ‘पराविद्या’ और ‘अपरा विद्या’ में क्या अंतर है? उनके महत्व पर प्रकाश डालिए।
अथवा
मुण्डकोपनिषद् के अनुसार आत्मा की प्राप्ति किन साधनों से संभव है? विस्तार से लिखिए।
BSKC-111 Assignments Details
| University | : | IGNOU (Indira Gandhi National Open University) |
| Title | : | Vaidik Sahitya |
| Language(s) | : | Sanskrit |
| Code | : | BSKC-111 |
| Degree | : | |
| Subject | : | Sanskrit |
| Course | : | Core Courses (CC) |
| Author | : | Gullybaba.com Panel |
| Publisher | : | Gullybaba Publishing House Pvt. Ltd. |







