IGNOU BHDC-134 (January 2026 – July 2026) Assignment Questions
खंड-क
1. निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए ।
(क) पिताजी उनको बड़ा स्नेह करते थे। उनकी सभी इच्छाएँ वह पूरी करते। पिता का यह स्नेह उन्हें बिगाड़ न दे, इस बात का मेरी माता को खासा खयाल रहता था। वह अपने अनुशासन में सावधान थीं। मेरी बुआ को कम प्रेम करती थीं, यह तो किसी हालत में नहीं कहा जा सकता। पर आर्य गृहिणी का जो उनके मन में आदर्श था, मेरी बुआ को वे ठीक उसी के अनुरूप ढालना चाहती थीं।
(ख) नाश्ता कर गजाधर बाबू बैठक में चले गए। घर छोटा था और ऐसी व्यवस्था हो चुकी थी कि उसमें गजाधर बाबू के हरने के लिए कोई स्थान न बचा था। जैसे किसी मेहमान के लिए कुछ अस्थायी प्रबंध कर दिया जाता है. उसी प्रकार बैठक में कुर्सियों को दीवार से सटाकर बीच में गजाधर बाबू के लिए पतली सी चारपाई डाल दी गई थी- गजावर बाबू उस कमरे में पड़े-पड़े, कभी-कभी अनायास ही इस सुस्थायित्व का अनुभव करने लगते। उन्हें याद हो आती उन रेलगाड़ियों की, जो आतीं और थोड़ी देर रुककर किसी और लक्ष्य की ओर चली जातीं।
खंड-ख
2. हिन्दी गहा के विकास की विवेचना कीजिए।
3. त्याग-पत्र उपन्यास के संरचना और शिल्प पर प्रकाश डालिए।
4. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।
क) नमक का दारोगा कहानी का कथा-सार
ख) गजाधर बाबू की चारित्रिक विशेषताएँ
खंड-ग
5. हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंधों की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
6. लोभ और प्रीति निबंध के विचार पश्न का विवेचन कीजिए।
7. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।
क) हिन्दी निबंध साहित्य के विकास में रामचंद्र शुक्ल का योगदान
ख) सहस्त्र फणों का मणि-दीप निबंध का नाव-पक्ष
IGNOU BHDC-134 (January 2025 – July 2025) Assignment Questions
खंड-क
1. निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) घर आकर मैंने पत्र सीधा बुआ को दे दिया और वह उसको खोलकर तभी पढ़ने में लग गई। खत बड़ा नहीं था। लेकिन कई मिनट तक वह उसे पढ़ती रही। यह भी भूल गई कि प्रमोद भी उनको कोई है और इस वक्त वह पास ही खड़ा है। काफी देर के बाद उन्होंने वहाँ से आँख हटाई, खत को धीमे-धीमे तह किया और मुझको देखा मानो उस वक्त मुझे वह पहचान नहीं रही थीं। मानों सब भूल गई कि कया था, क्या है, क्या होगा। फिर उसी बेबूझ भाव से मुझे देखते रहकर मानो यंत्र की भाँति उस खत को फाड़कर नन्हें-नन्हें टुकड़ों में कर दिया। मानों वह कुछ नहीं कर रहीं, जाने कौन करा रहा है।
(ख) वंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठ कर सत्कार किया, किंतु स्वाभिमान सहित। समझ गये कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा प्रार्थना की चेष्टा नहीं की। वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असहृदय-सी प्रतीत हुई। पर पंडित जी की बातें सुनी तो मन की मैल मिट गयी। पंडित जी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। सद्भाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले-यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई है उसे क्षमा कीजिए। मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था, नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर।
खंड-ख
2. हिन्दी गद्य की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
3. ‘आकाशदीप कहानी के प्रमुख पात्रों का परिचय दीजिए।
4. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।
क) नमक का दारोगा कहानी की भाषा-शैली
ख) ‘त्यागपत्र’ उपन्यास का सार
खंड-ग
5. लोम और प्रीति के भाव पक्ष का विवेचन कीजिए।
6. सहस्त्र फणों का मणि-दीप के कथ्य का विश्लेषण कीजिए।
7. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।
क) निबंध के तत्व
ख) कुटज की भाषा