PLEASE MATCH YOUR ASSIGNMENT QUESTIONS ACCORDING TO YOUR SESSION
IGNOU MHD-04 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
खंड-1
1. निम्नलिखित अवतरणों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
(क) युद्ध क्या गान है? रूद्र का शृंगीनाद्, भैरवी का तांडव नृत्य और शस्त्रों का वाद्य मिलकर एक भैरव-संगीत की सृष्टि होती है। जीवन के अंतिम दृश्य को जानते हुए, अपनी आंखों से देखना, जीवन-रहस्य के चरम सौंदर्य की नग्न और भयानक वास्तविकता का अनुभव-केवल सच्चे वीर-हृदय को होता है, ध्वंसमयी महामाया प्रकृति का वह निरंतर संगीत है। उसे सुनने के लिए हृदय में साहस और बल एकत्र करो। अत्याचार के श्मशान में ही मंगल का शिव का सत्य सुंदर संगीत का समारंभहोता है।
(ख). मैं दो बड़े पहियों के बीच लगा हुआ
एक छोटा निरर्थक शोभा-चक्र हूँ
जो बड़े पहियों के साथ घूमता है
पर रथ को आगे नहीं बढ़ाता
और न धरती ही छू पाता है।
और जिसके जीवन का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है
कि वह धुरी से उतर भी नहीं सकता !
(ग). धर्म, नीति, मर्यादा, यह सब हैं केवल आडम्बर मात्र,
मैंने यह बार-बार देखा था।
निर्णय के क्षण में विवेक और मर्यादा
व्यर्थ सिद्ध होते आये हैं सदा
हम सब के मन में कहीं एक अंध गहवर है।
बर्बर पशु, अंधा पशु वास वहीं करता है.
स्वामी जी हमारे विवेक का,
नैतिकता, मर्यादा, अनासक्ति, कृष्णार्पण
यह सब है अंधी प्रवृत्तियों की पोशाकें
जिनमें कटे कपड़ों की आँखें सिली रहती हैं
मुझको इस झूठे आडम्बर से नफरत थी
इसलिए स्वेच्छा से मैंने इन आँखों पर पट्टी चढ़ा रखी थी।
(घ). साँच कहैं ते पनही खावें।
झूठे बहु विधि पदबी पावैं।
छलियन के एका के आगे।
लाख कहौ एकहु नहिं लागे ।।
भीतर होइ मलिन की कारो।
चाहिए बाहर रंग चटकारो।।
धर्म अधर्म एक दरसाई।
राजा करे सो न्याव सदाई ।।
भीतर स्वाहा बाहर सादे।
राज करहि अगले अरू प्यादे ।।
अंधाधुंध मच्यौ सब देसा।
मानहुँ राजा रहत विदेसा ।।
गो द्विज श्रुति आदर नहिं होई।
मानहुँ नृपति विधर्मी कोई।।
2. भारतेंदु ने ‘अंधेर नगरी के माध्यम से तत्कालीन राज व्यवस्था के प्रति किस तरह का दृष्टिकोण व्यक्त किया है ?
3. ‘स्कंदगुप्त चरित्र प्रधान नाटक है। इस कथन के संदर्भ में स्कंदगुप्त की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
4. हिंदी नाटक परंपरा में ‘आधे-अधूरे का स्थान निर्धारित कीजिए।
5. ललित निबंध की दृष्टि से कुटज की विशेषताओं क विवेचन कीजिए।
6. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए।
(क) लोभ और प्रीति’ का प्रतिपाद्य
(ख) ‘अंधायुग’ मिथकीय चेतना
(ग) ठुकरी बाम की चारित्रिक विशेषता
(घ) कलम का सिपाही: शिल्पगत वैशिष्ट्य
IGNOU MHD-04 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
1. निम्नलिखित अवतरणों की संदर्भ साडित व्याख्या कीजिए।
(क) संस्कृति थी यह एक बूढ़े और अंधे की जिसकी संतानों ने महायुद्ध चोषित किए, जिसके अंधेपन में मर्यादा गलित अंग वेश्या-सी प्रजाजनों को भी रोगी बनाती फिरी उस अंधी संस्कृति, उस रोगी मर्यादा की रक्षा हम करते रहे सत्रह दिन।
(ख) कविता करना अनंत पुण्य का फल है। इस दुराशा और अनंत उत्कठा से कवि-जीवन व्यतीत करने की इच्छा हुई। संसार के समस्त अभावों को असंतोष कहकर हृदय को धोखा देता रहा। परंतु कैसी विडंबना। लक्ष्मी के लालों का भू-भंग और क्रोम की ज्याला के अतिरिक्त मिला क्या। एक काल्पनिक प्रशंसनीय जीवन, जो दूसरों की दया में अपना अस्तित्व रखता है। संचित हृदय कोश के अमूल्य रत्नों की उदारता और दारिद्रय का व्यंग्यात्मक कठोर अट्टहास, दोनों की विषमता की कौन-सी व्यवस्था होगी।
(ग). चना खायें तौकी, मैना। बोले अच्छा बना चबैना।। चना खायें गफूरन, मुन्नी। बोलें और नहीं कुछ सुन्ना।। चना खाते सब बंगाली। जिनकी धोती ढीली-डाली।। चना खाते मियाँ जुलाहे। डाढ़ी हिलती गाह बगाहे ।। चना हाकिम सब जो खाते। राब पर दूना टिकस लगाते ।। चने जोर गरम टके सेर।
(घ). ऐसा जीवन तो वितंबना है, जिसके लिए रात-दिन लड़ना पड़े। आकाश में जब शीतल शुभ्र शरद-शशि का विलास हो, तब भी दांत पर दांत रखे मुद्धियों को बांधे लाल आंखों से एक-दूसरे को घूरा करें। बसंत के मनोहर प्रमात में निभूत कगारी में चुपचाप बहने वाली सरिताओं का स्रोत गरम रक्त बहाकर लाल कर दिया जाय। नहीं-नहीं, चक्र। मेरी समझ में मानव जीवन का यही उद्देश्य नहीं है। कोई और भी निगूढ रहस्य है चाहे में स्वयं उसे न जान सका है।
2 सामाजिक यथार्थ के परिप्रेक्ष्य में अंधेर नगरी नाटक की समीक्षा कीजिए।
3. जयशंकर प्रसाद के नाटक और रंगमंच संबंधी निबंधों के आधार पर उनकी नाट्य दृष्टि पर विचार कीजिए।
4. अंपायुग अधों के बहाने ज्योति की कथा है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
5. ‘कलम का सिपाही जीवनी के शिल्पगत वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए।
6. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए।
(क) ताँबे के कीड़े की कथावस्तु
(ख) लोभ और प्रीति की विशेषताएँ
(ग) क्या भूलूँ क्या याद करू की संरचनात्मक विशेषताएँ
(घ) अदम्य जीवन मूल संवेदना





