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IGNOU MSK-01 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
1. अधोलिखित में से किन्हीं तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :-
(क) तस्य स्थित्वा कथमपि पुरः कौतुकाधानहेतो।
रन्तर्बाष्पश्चिरमनुचरो राजराजस्य दध्यौ ।।
मेघालोके भवति सुखिनोऽप्यन्यथावृत्ति चेतः ।
कण्ठाश्लेषप्रणयिनि जने किं पुनर्दूरसंस्थे ।।
(ख) छन्नोपान्तः परिणतफलद्योतिभिः काननाम्रै।
स्त्वय्यारूढे शिखरमचलः स्निग्धवेणीसवर्णे ।।
नूनं यास्यत्यमरमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां ।
मध्ये श्यामः स्तन इव भुवः शेषविस्तारपाण्डुः ।।
(ग) प्रद्योतस्य प्रियदुहितरं वत्सराजोऽत्र जहे।
हैमं तालद्रुमवनमभूदत्र तस्यैव राज्ञः ।।
अत्रोद्धान्तः किल नलगिरिः स्तम्भमुत्पाट्य दर्पा।
दित्यागान्तून् रमयति जनो यत्र बन्धूनभिज्ञः ।।
(घ) श्यामास्वङ्ग, चकितहरिणीप्रेक्षणे दृष्टिपातं ।
वक्त्रच्छायां शशिनि, शिखिनां बर्हभारेषु केशान् ।।
उत्पश्यामि प्रतनुषु नदीवीचिषु भ्रूविलासान्।
हन्तैकस्मिन्क्वचिदपि न ते चण्डि ! सादृश्यमस्ति ।।
(च) यत्रोन्मत्तभ्रमरमुखराः पादपा नित्यपुष्पा।
हंसश्रेणीरचितशना नित्यपद्मा नलिन्यः ।।
केकोत्कण्ठा भवनशिखिनो नित्यभास्वत्कलापा।
नित्यज्योत्स्नाः प्रतिहततमोवृत्तिरम्याः प्रदोषाः ।।
2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
क) महाकाव्य की परिभाषा तथा महाकाव्य के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालें।
ख) कथासाहित्य का उद्भव कैसे हुआ? विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें।
ग) रस-निरूपण पर प्रकाश डालें।
घ) काव्य की परिभाषा देते हुए काव्य प्रयोजन का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
3. निम्नलिखित में से किन्हीं दो का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(क) वासवदत्ता
(ख) चारुदत्त
(ग) यक्ष
(घ) शाकार
4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए।
(क) बुद्ध चरितम्
(ख) नायिका भेद
(ग) रूपक
(घ) अर्थक्षेपक
IGNOU MSK-01 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
1. अधोलिखित की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :-
(क) संचारपूतानि दिगन्तराणि
कृत्वा दिनान्ते निलयाय गन्तुम् ।
प्रचक्रमे पल्लवरागताम्रा
प्रभा पतड, गस्य मुनेश्च धेनुः ।।
अथवा
तत्याज शस्त्रं विमर्श शास्त्र
शमं सिरेपे नियमं विषेहे।
वशीव कञ्चिद्विषयं न भेजे
पितेव सर्वान् विषयान् ददर्श ।।
(ख) हारांस्तारांस्तरलगुटिकान् कोटिशः शड, खुशक्तीः
शष्पश्यामान् मरकतमणीनुन्मयूखप्ररोहान् ।
दृष्ट्वा यस्यां विपणिरचितान् विद्रुमाणां च भङ, गान्
संलक्ष्यन्ते सलिलनिधयस्तोयमात्रावशेषाः । ।
अथवा
तामुत्तीर्य व्रज परिचितभ्रूलताविभ्रमाणां
पक्ष्मोत्क्षेपादुपरिविलसत्कृष्णशरप्रभाणाम् ।
कुन्दक्षेपानुगमधुकर श्रीमुषामात्म
पात्रीकुर्वन्दशपुरवधूनेत्र कौतूहलानाम् ।।
(ग) तस्योत्सङ्गे प्रणयिन इव स्रस्तगड, गादुकूलां
न त्वं दृष्ट्वा न पुनरलकां ज्ञास्यसे कामचारिन् ।।
या वः काले वहित सलिलोद्गारमुच्चैर्विमाना
मुक्ताजालग्रथितमलकं कामिनीवाभ्रवृन्दम् ।।
अथवा
श्यामास्वड,गं, चकितहरिणीप्रेक्षणे दृष्टिपातं,
वक्त्रच्छायां शशिनि, शिखिनां बर्हभारेषु केशान् ।
उत्पश्यामि प्रतनुषु नदीवीचिषु भ्रूविलासान्,
हन्तैकस्मिन्क्वचिदपि न ते चण्डि ! सादृश्यमस्ति ।।
2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
क) रस के भेदों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें ।
ख) साहित्यदर्पण के अनुसार रस निरूपण का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
ग) काव्य की परिभाषा देते हुए काव्य प्रयोजन का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
घ) महाकाव्य क्या हैं ? प्रकाश डालें।
3. निम्नलिखित में से किन्हीं दो का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
(क) चारूदत्त
(ख) वासवदत्ता
(ग) यक्षणि
(घ) शूद्रक
4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए।
(क) नाटक के अंग
(ख) नायक की परिभाषा
(ग) कार्यावस्थाएँ
(घ) पंच सन्धियाँ




