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IGNOU MSK-03 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
1. अधोलिखित में से किन्ही तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) प्रतिविषयाध्यवसायो दृष्टं त्रिविधमनुमानमाख्यातम् ।
तल्लिङ्गलिङ्गीपूर्वकमाप्तश्रुतिराप्तवचनन्तु ।।
(ख) हेतुमदनित्यमव्यापि, सक्रियमनेकमाश्रितं लिङ्गम् । सावयवं परतन्त्रं व्यक्त, विपरीतमव्यक्तम् ।।
(ग) अध्यवसायो बुद्धिर्धर्मो ज्ञानं विराग ऐश्वर्यम् । सात्त्विकमेतद्रूपं तामसमस्माद्विपर्यस्तम् ।।
(घ) ऊहः शब्दोऽध्ययनं दुःखविघातास्त्रयः सुहृत्प्राप्तिः ।
दानं च सिद्धयोऽष्टौ सिद्धेः पूर्वोऽङकशस्त्रिविधः ।।
(ङ) तत्र जरामरणकृतं दुःखं प्राप्नोति चेतनः पुरुषः ।
लिङ्गस्याविनिवृत्तेस्तस्माद् दुःखं स्वभावेन ।।
(च) वत्सविवृद्धिनिमित्तं क्षीरस्य यथा प्रवृत्तिरज्ञस्य ।
पुरूषविमोक्षनिमित्तं तथा प्रवृत्तिः प्रधानस्य ।।
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
2. वेदान्त के अनुबन्धचतुष्ट्य की विवेचना कीजिए।
3. साधनचतुष्ट्य को स्पष्ट कीजिए।
4. परिणामवाद एवं विवर्तवाद में भेद स्पष्ट कीजिए।
5. वेदान्तविद्या का अधिकारी होने के लिए क्या अपेक्षित है।
6. गुणत्रय का निरूपण कीजिए।
7. सांख्य के अनुसार सृष्टि कितने प्रकार की होती हैं।
8. कर्म कितने प्रकार के होते हैं; स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 1000 शब्दों में लिखिए।
9. नासतो विद्यते भावो नाऽभावो विद्यते सतःय इस उक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए तथा कार्य उत्पत्ति की पांच युक्तियों की चर्चा कीजिए।
10. भारतीय दर्शन परंपरा में अन्नम्भट्ट के योगदान को रेखांकित कीजिए।
11. धर्म का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसकी भावना तथा वेद की अपौरुषता पर प्रकाश डालें।
IGNOU MSK-03 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
1. अधोलिखित की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) असदकरणादुपादानग्रहणात्सर्वसंभवाभावात् ।
शक्तस्य शक्यकरणात् कारणभावाच्च सत्कार्यम् ।।
अथवा
उभयात्मकमत्र मनः संकल्पकमिन्द्रियं च साधर्म्यात् ।
गुणपरिणामविशेषान्नानात्वं बाह्यभेदाश्च ।।
(ख) पंच विपर्ययभेदाभवन्त्यशक्तिश्च करणवैकल्यात् ।
अष्टाविंशतिभेदा तुष्टिर्नवधाऽष्टधा सिद्धिः ।।
अथवा
एकादशेन्द्रियवधाः सहबुद्धिवधैरशक्तिरुद्दिष्टा ।
सप्तदश वधा बुद्धेर्विपर्ययातुष्टिसिद्धीनाम् ।।
(ग) एवं तत्वाभ्यास्यान्नास्मि न में नाहमित्यपरिशेषम् ।
अविपर्ययाद् विशुद्धं केवलमुत्पद्यते ज्ञानम् ।।
अथवा
दृष्टा मयेत्युपेक्षक एको दृष्टाहमित्युपरमत्यन्या।
सति संयोगेऽपि तयोः प्रयोजनं नास्ति सर्गस्य ।।
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
2. परमतत्व को देखने के उपायों का उल्लेख कीजिए ।
3. सांख्य दर्शन के तत्वों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
4. बौद्ध दर्शन के योगाचार, विज्ञानवाद सम्प्रदाय का आलोचनात्मक विवरण दीजिए ।
5. दर्शन से क्या तात्पर्य है? विस्तृत रूप से स्पष्ट करें।
6. कर्म के पांच भेद कौन से हैं? विस्तारपूर्वक वर्णन करें ।
7. बौद्ध दर्शन की चार प्रमुख शाखाएँ कौन-कौन सी हैं ? स्पष्ट करें।
8. पंचीकरण प्रक्रिया को स्पष्ट करें।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 1000 शब्दों में लिखिए |
9. वेदान्त सार के प्रतिपाद्य विषयवस्तु का विस्तृत रूप से उल्लेख करें।
10. सृष्टि प्रक्रिया का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
11. धर्म का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसकी भावना तथा वेद की अपौरुषता पर प्रकाश डालें ।





