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IGNOU MSK-05 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
1. अधोलिखित में से किन्हीं तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) अग्निर्होता कविक्रतुः, सत्यश्चित्रश्रवस्तमः ।
देवो देवेभिरा गमत् ।।
(ख) यः सुन्वते पचते दुध आ चिद् वाजं दर्दर्षि स किलासि सत्यः ।
वयं त इन्द्र विश्वह प्रियासः सुवीरासो विदथमा वदेम ।।
(ग) येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः ।
यदपूर्व यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ।।
(घ) यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास् तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् ।
ते ह नांक महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः
(ङ) यं क्रन्दसी अवसा तस्तभाने अभ्यैक्षेतां मनसा रेजमाने।
यत्राधिसूर उदितो विभाति कस्मै देवाय हविषा विधेम ।।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं पांच के उत्तर लगभग 500 शब्दों में लिखिए।
2. निपात के लक्षण बताते हुए निपातों के विभाग का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
3. ऋग्वेद संहिता का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
4. ब्राह्मण ग्रंथों का देशकाल एवं उनके प्रतिपाद्य विषय को बताएं।
5. वैदिक देवताओं के स्वरूप का वर्णन करें।
6. प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली को स्पष्ट करें।
7. वैदिक संधि को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
8. पुरूषार्थ चतुटष्य का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 1000 शब्दों में लिखिए।
9. महाभारतकालीन सभ्यता और संस्कृति का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
10. पुराणकालीन सभ्यता और संस्कृति पर प्रकाश डालें।
11. प्राचीन भारत में ‘नारी’ पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें।
IGNOU MSK-05 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
1. अधोलिखित की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) अभीवृतं कृशनैर्विश्वरूपं हिरण्यशम्यं यजतो बृहन्तम् ।
आस्थाद्रथं सविता चित्रभानुः कृष्णा रजांसि तविषीं दधानः ।।
अथवा
अस्मै ग्रामाय प्रदिशश्चतस्र ऊर्ज सुभूतं स्वस्ति सविता नः कृणोतु ।
अशञ्चिन्द्रो अभयं नः कृणोत्वन्यत्र राज्ञामभि यातु मन्युः ।।
(ख) यं क्रन्दसी अवसा तस्तभाने अभ्यैक्षेतां मनसा रेजमाने ।
यत्राधिसूर उदितो विभाति कस्मै देवाय हविषा विधेम ||
अथवा
न मृत्युरासीदमृतं न तर्हि न रात्र्या अह्न आसीत् प्रकेतः ।
आनीदवातं स्वधया तदेकं तस्माद्धान्यन्न परः किं चनास ।।
(ग) नासदासीन्नो सदासीत् तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत् ।
किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद्गहनं गभीरम् ।।
अथवा
शिक्षा व्याकरण धन्दों निरूक्तं ज्योतिषं तथा ।
कल्पश्चेति षडड्.गनि वेदस्या हुर्मनीषिणः ।।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में लिखिए ।
2. वैदिक संहिताओं का परिचय दीजिए ।
3. ब्राहमण ग्रंथों के प्रतिपाद्य को स्पष्ट करें।
4. उपनिषद के रचनाकाल पर प्रकाश डालिए ।
5. वैदिक संहिताओं के प्रमुख भाष्यकारों पर प्रकाश डालिए ।
6. अरण्यकों का परिचय देते हुए उनकी विषयवस्तु को स्पष्ट करें ।
7. सोमयाज्ञ पर संक्षेप में प्रकाश डालें ।
8. वेदों के काल निर्धारण पर प्रकाश डालें ।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 1000 शब्दों में लिखिए ।
9. वैदिककालीन राजनीतिक जीवन पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालें।
10. शिक्षा ग्रंथों का वर्णन करते हुए चारों वेदों के शिक्षा ग्रंथ पर प्रकाश डालें ।
11. वेदांग किसे कहते हैं? वेदांगों को स्पष्ट करते हुए उनके महत्व पर विस्तृत रूप से लिखें ।




