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IGNOU MSK-32 (January 2026 – July 2026) Assignment Questions
1. न्याय-वैशेषिक दर्शन में आत्मा को ‘ज्ञान का आधार’ क्यों माना गया है, ‘ज्ञान-स्वरूप’ क्यों नहीं? जीवात्मा और परमात्मा के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
2. हानादि बुद्धि क्या है और प्रत्यक्ष ज्ञान की प्रक्रिया में इसका महत्त्व ‘सर्प’ और ‘स्वर्ण’ के उदाहरणों के माध्यम से समझाएँ।
3. संयुक्त समवेत समवाय सन्निकर्ष को चित्र सहित समझाएँ।
4. लिङ्ग (हेतु) के तीन ज्ञान चरणों को उदाहरण सहित स्पष्ट करते हुए सिद्ध कीजिए कि लिङ्गपरामर्श (लिङ्गपरामर्शोऽनुमानम्) ही अनुमिति का अन्तिम और अनिवार्य करण क्यों कहलाता है।
5. साधारण अनैकान्तिक हेत्वाभास और असाधारण अनैकान्तिक हेत्वाभास में क्या मौलिक अंतर है?
6. वैशेषिक दर्शन के मत का विस्तृत वर्णन कीजिए कि वे उपमान को पृथक् प्रमाण क्यों नहीं मानते ?
7. न्याय-वैशेषिक दर्शन में अप्रामाण्य (अयथार्थता) का ग्रहण किस प्रकार होता है? उदाहरण सहित समझाइए ।
8. न्याय-वैशेषिक दर्शन में साधारण निमित्त कारण किन्हें माना गया है?




