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IGNOU BHDC-133 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिये:
क) नई नई नित तान सुनावै।
अपने जाल में जगत फंसावै।
नित नित हमै कराई बल सून।
क्यों सखि साजन नहीं कानून।
ख) सलय-कर स्वागत-हेतु हिला करते हैं,
मृदु मनोभाव-सम सुमन खिला करते हैं।
डाली में नव फल नित्य मिला करते हैं
तृण तृण पर मुक्ता-भार झिला करते हैं।
निधि खोले दिखला रही प्रकृति निज माया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
ग) जिस निर्जन में सागर लहरी,
अम्बर के कानों में गहरी-
निश्छल प्रेम-कथा कहती हो,
तज कोलाहल की अवनी रे।
जहाँ साँझ-सी जीवन छाया,
ढीले अपनी कोमल काया,
नील नयन से ढुलकाती हो,
ताराओं की पाँति घनी रे।
घ) अन्य होंगे चरण हारे,
और हैं जो लौटते, दे शूल को संकल्प सारे;
दुखव्रती निर्माण उन्मद,
यह अमरता नापते पद,
बाँध देंगे अंक-संसृति
से तिमिर में स्वर्ण बेला !
IGNOU BHDC-133 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
खंड – क
निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिये :
1. भीतर भीतर सब रस चूसै ।
हंसिहंसि के तन मन धन मूँसे ।
जाहिर बातन में अति तेज
क्यों सखि साजन नहीं अंग्रेज ।
2. सिद्धि हेतु स्वामी गए, यह गौरव की बात,
पर चोरी-चोरी गए, यही बड़ा व्याघात,
सखी, वे मझु से कह कर जाते
कह, तो क्या मुझसे वे अपनी पथ-बाधा ही पाते ?
3. कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बँधा यौवन,
नत नयन, प्रिय कर्मरत मन,
गुरु हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार-
सामने तरु-मालिका अट्टालिका प्राकार ।
4. न जाने, तपक तड़ित में कौन
मुझे इंगित करता तब मौन ।
देख वसुधा का यौवन भार
गूँज उठता है जब मधुमास,
विधुर उर के-से मृदु उदगार
कुसुम जब खुल पड़ते सोच्छ्वास
न जाने, सौरभ के मिस कौन
सँदशा मुझे भेजता मौन ।
खंड – ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
5. भारतेन्दु हरिश्चद्रं के काव्य शिल्प पर प्रकाश डालिए ।
6. द्विवेदी युगीन कविता के प्रदेय पर विचार कीजिये?
7. जयशंकर प्रसाद की कविता में प्रकृति और मानवता के स्वरूप का विवेचन कीजिये ।
8. पंत की काव्य चेतना के विकास का वर्णन कीजिये ।
खंड – ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए :
9. ‘प्रियप्रवास’ का मलू प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिये ।
10. मैथिलीशरण गुप्त की कविता में नारी सम्मान की भावना पर विचार कीजिये ।
11. रामनरेश त्रिपाठी की राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डालिए ।
12. ‘मैं नीर भरी दुख की बदली कविता का मूल भाव क्या है ?






