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IGNOU MHD-23 (July 2025 – January 2026) Assignment Questions
1. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
(क) कदरि कम्भ दोइ चीर पहिराये। चाँद चलन अपुरुब घर लाये।।
औ समतोल दीख असि धारा। देख विमोह सरंग पँतारा ।।
देखि कम्भ मोर मन तस लागा। सरनैं धरउँ खाल कँ नाँगा ।।
चौदह चॉन देखि पाँ लागहि। पाप केत बरसहिं कर ।।
रूप पुतरि गढ़ दस नख लावा। तरुवहि रकत भू तर चलि ।।
(ख) ऐसा ध्यान धरौ बनवारी, मन पवन दृढ़ सुषमन नारी।।
से जप जपूँ जो बहुरि न जपना, सो तप तपूँ जो बहुरि न तपना ।।
से गुरु करूँ जो बहुरि न करना, ऐसो मरूँ जो बहुरि न मरना ।।
उल्टी गंग जमुन में लाऊँ, बिन ही जल मज्जन दै पाऊँ ।।
लोचन भरि-भरि बिम्ब निहारूँ, जेति विचारि न और विचारूँ ।।
(ग) बूझत स्याम कौन तू गोरी।
कहाँ रहति, काकी है बेटी, देखी तहीं कहूँ ब्रज खोरी ।।
काहे कौं हम ब्रज-तन आवतिं, खेलति रहतिं आपनी पौरी ।।
सुनत रहतिं स्रवननि नँद-ढोटा, करत फिरत माखन-दधि चोरी।।
तुम्हरौ कहा चोरि हम लैहैं, खेलन चलौ संग मिलि जोरी ।।
सूरदास प्रभु रसिक-सिरोमनि, बातनि भुरइ राधिका भोरी ।।
(घ) धूर भरे अति शोभित स्याम जू तैसी बनी सिर सुन्दर चोटी।
खेलत खात फिरै अँगना पग पैंजन बाजती, पीरी कछोटी ।।
व छवि को रसखानि बिलोकत बारत काम-कला निज कोटी।
काग के भाग बड़े सजनी हरि हाथ सों लै गयो माखन रोटी ।।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500-500 शब्दों में दीजिए :
(क) मध्ययुगीनता की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
(ख) संत रविदास का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
(ग) रसखान की प्रेमभावना का विवेचन कीजिए।
3. निम्नलिखित विषयों में से प्रत्येक पर लगभग 200 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :
(क) सूरदास की काव्य-भाषा
(ख) ‘चंदायन’ की कथा
(ग) सहज-शून्य
IGNOU MHD-23 (July 2024 – January 2025) Assignment Questions
1. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
(क) राजा गियँ कै सुनहु निकाई । जनु कुम्हार धरि चाक फिराई ||
भगत नारि कचौरा लावा । पीत निरातर गहि दिखरावा ।।
देव सराहँहि (तैसो ) गोरी । गियँ उँचार गह लिहसि अजोरी ।।
अस गियँ मनुसँहि दीख न काहू । ठास धरा जनु चलै कियाहू ||
का कहुँ असकै दयी सँवारीं । को तिह लाग दयि अँकवारी ।।
(ख) जा कारण मैं दौर्यो फिरतो, सो अब घट में आई ।
पाँचों मेरी सखी सहेली, तिनि निधि दई दिखाईं
अब मन फूलि भयो जग महियाँ, आप में उलटि समाईं । ।
चलत चलत मेरो मन थाक्यो, मो पै चल्यो न जाई ।
साँई सहज मिल्यो सोई सन्मुख, कह रैदास बताई ।।
(ग) रुकमिनि राधा ऐसैं भेंटी |
जैसैं बहुत दिननि की बिछुरी, एक बाप की बेटी ।।
एक सुझाव एक वय दोऊ, दोऊ हरि कौं प्यारी ।
एक प्रान मन एक दुहुनि कौ, तन करि दीसति न्यारी । ।
निज मंदिर लै गई रुकमिनी, पहुनाई बिधि ठानी।
सूरदास प्रभु तहँ पग धारे, जहँ दोऊ ठकुरानी । ।
(घ) प्रान वही जु रहैं रिझि वापर रूप वही लिहिं वाहि रिझायो ।
सीस वही जिन वे परसे पद, अंक वही जिन वा परसायो । ।
दूध वही जु दुहायो री वाही दही सु सही जो वही ढरकायो ।
और कहाँ लौं कहों रसखानि री भाव वही जु वही मनभायो । ।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500-500 शब्दों में दीजिए :
(क) सगुण काव्यधारा के प्रमुख पारिभाषिक शब्दों पर प्रकाश डालिए ।
(ख) ‘चंदायन’ में अभिव्यक्त लोकजीवन के विविध रूपों का विवेचन कीजिए ।
(ग) भक्तिकालीन प्रमुख कृष्णभक्त कवियों का परिचय दीजिए ।
3. निम्नलिखित विषयों में से प्रत्येक पर लगभग 200 शब्दों में टिप्पणी लिखिए:
(क) भ्रमरगीत
(ख) रसखान के काव्य में भक्ति
(ग) रविदास के काव्य में ‘जीव’ का स्वरूप






