IGNOU BSKS-191 Bhartiya Vastukala Pranali - IGNOU Solved Assignment (Latest)
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IGNOU BSKS-191 (January 2026 – July 2026) Assignment Questions
(क) अधोलिखित लोकों में से किन्ही तीन लोकों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए:
(1)परगेहकृताः सर्वाः श्रौतस्मार्तक्रियाः शुभाः ।
निष्फलाः स्युर्यतस्तासां भूमीशः फलमश्रुते ।।
(2) जलान्तं प्रस्तरान्तं वा पुरुषान्तमथापि वा ।
क्षेत्रं संशोध्य वोद्धृत्य शल्यं सदनमारभेत् ।।
(3) मूलद्वारं नान्यैद्वरैिरभिसन्दधीत रूपद्धर्या ।
घट-फल-पत्र-प्रथमादिभिश्व तन्मङ्गलैश्चिनुयात् ।।
(4) नन्द्यावर्तमलि नन्द्यावर्तमलिन्दैः शालाकुड्यात प्रदक्षिणान्तगतैः ।
द्वारं पश्चिममस्मिन् विहाय शेषाणि कार्याणि ।।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :-
1. वास्तुशास्त्र की आचार्य परम्परा का वर्णन कीजिए ।
2. भूमि-परीक्षण की किन्हीं दो विधियों का उल्लेख कीजिए।
3. शकुन के द्वारा भूमि में शल्य का ज्ञान किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए ।
4. द्वारवेधफलों का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
(ग) निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए: –
(i) राहु मुख पुच्छ विचार
(ii) त्रिशालवास्तु
(iii) मर्मस्थान
(iv) वास्तु-प्रयोजन
(v) आयादि शुद्धि विचार
IGNOU BSKS-191 (January 2024 – July 2024) Assignment Questions
(क) व्याख्या आधारित प्रश्न : –
1. अधोलिखित श्लोकों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए:-
(अ) गृहस्थस्य क्रियाः सर्वा न सिद्ध्यन्ति गृहं विना ।
यतस्तस्माद् गृहारम्भप्रवेशसमयौ ब्रुवे ।।
अथवा
क्षेत्रमादौ परीक्ष्येत गन्धवर्णरसप्लवैः।
सुमध्वाज्यान्नपिशितं गन्धं विप्रानुपूर्वकम् ।।
(ब) अर्धनिर्मितं कृतं वा प्रविशन् स्थपतिर्गृहे निमित्तानि ।
अवलोकयेद् गृहपतिः क्व संस्थितः स्पृशति किं चाङ्गम् ।।
अथवा
एकादशभागयुतः ससप्ततिर्नृपबलेशयोर्व्यासः ।
उच्छ्रायोऽङ्गुलतुल्यो द्वारस्यार्धेन विष्कम्भः ।।
(स) मार्गतरुकोणकूपस्तम्भभ्रमविद्धमशुभदं द्वारम् ।
उच्छ्रायाद्द्विगुणितमितां त्यक्त्वा भूमिं न दोषाय ।।
अथवा
एकाशीतिविभागे दशदश पूर्वोत्तरायता रेखाः ।
अन्तस्त्रयोदश सुरा द्वात्रिंशद्वाह्यकोष्ठस्थाः ॥
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर दीजिए :-
1. वास्तुशास्त्र का परिचय देते हुए वास्तुशास्त्रीय प्रमुख ग्रन्थों का वर्णन कीजिए ।
2. भूमि परीक्षण के विषय में विस्तृत विवेचन कीजिए ।
3. भूमि में शकुन के द्वारा तथा सूत्र प्रसारण के समय शल्य का ज्ञान किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए ।
4. पञ्चचतुश्शाल गृहों का विस्तार सहित वर्णन कीजिए ।
5. एकाशीतिपद वास्तुमण्डल पर प्रकाश डालिए ।
(ग) निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए: –
(i) वास्तुपुरुष का स्वरूप
(ii) वृष वास्तुचक्र
(iii) गृहमेलापक
(iv) मर्म स्थान
(v) गवाक्षादि विचार
BSKS-191 Assignments Details
| University | : | IGNOU (Indira Gandhi National Open University) |
| Title | : | Bhartiya Vastukala Pranali |
| Language(s) | : | Hindi |
| Code | : | BSKS-191 |
| Degree | : | |
| Subject | : | Sanskrit |
| Course | : | Skill Enhancement Courses (SEC) |
| Author | : | Gullybaba.com Panel |
| Publisher | : | Gullybaba Publishing House Pvt. Ltd. |







